प्रणाम आ जय भोजपुरी
एक साल पुरान घटना हवे जब हम जब बलिया गईल रहनी , पहुचे से पहिले बहुत खुश रहनी काहे कि हमार कई गो पुरान संघतिया लोग से मिले के मौका रहल वईसे त कई जाना बलिया से बाहर बाडन जा लेकिन कुछ लोग बा जवन अभी भी बा बलिया मे बा आ वोह मे एगो हमार मित्र अवनीश बाडन जवन आज बलिया के एगो बहुत बरियार नेता हवन, बहुत नाव बा उनुकर लोग उनुकर बहुत सम्मान करेला आ आज के राजनीति के समाचारन पे ध्यान देला के बाद हमरा उनुकर ही याद आ गईल हा । खैर हम पुरा घटनाक्रम के बतावे खातिर रउवा सब के तनी पीछे ले जाईब आ आपन वोह घरी के कुछ चीजन से परिचय कराईब ।
करीब करीब 1991 -92 के बात हवे , जब बलिया गईनी पढे खातिर ( 8 तकले गावे पढले रहनी ) आ ओजुगा पहुचला के बाद उ बडे बडे स्कुल देखनी आ एक से के दोस्त लोग मिलल लोग आ सब लोगन के बडे बडे ख्वाब , जब कही मिली जा त हमनी के बात होखे कि मुम्बई जाईब नोकरी करे त दिल्ली जाईब , खुब पईसा कमाईब आ अईसने कई जाना के विचार रहे , पिंटुवा त कहे कि भाई हम त मर्चेंट नेवी मे जाईब त केवनो कहे कि हम बैंक मैनेजर बनब त केहु डाक्टर त केहु इंजिनियर केहु विदेश जाये के भी कहल आ हमहु काहे शांत बईठी त हम कहनी कि भाई हमरा त उहे नोकरी चाही जवना मे पईसा खुबे होखे आ वोह खातिर देश जाई भा विदेश । वोही मंडली मे एगो मित्र रहलन अवनीश जी , जब उनुका से पुछाईल त उ कहलन की संघतिया लोग एगो बात हम त बहुत साफ कई दिहल चाहत बानी कि हम भारतीय हई , भारत खातिर मुअब जियब लेकिन कबो भारत छोड के ना जाईब , हम जवन भी कमाईब भारत के सेवा मे लगाईब ।
अवनीश्वा बात सुन के हमनी के मन मे ओकरा खातिर जवन आदर उमडत रहेकी कहे के ना , हमनी के हमेशा अवनीश्वा के आदर दिही जा आ अवनीश्वा भी हमेशा उहे धुने की हम त भाई खाली गरीबन खातिर लागल रहब , गरीबन के उपर अत्याचार ना होखे देब केहु कतहु गरीब ना रही , हर भारतीय के एक समान देखब आ अईसन करब की सब लोग एक दुसरा के एक नजर से देखो समानता बने लोगन के बीच मे । एह कुल के सुनला के बाद हमनी के गर्व होत रहे कि वाह बहुत जबरद्स्त संघतिया बा भाई । कई साल के बाद जब सब लोग छितरा गईल , केहु अमेरिका गईल त केहु रुस त केहु मुम्बई त केहु दिल्ली , आ हमहु वोह समय मुम्बई मे आ गईनी ।
साथ छुटल बात छुटल आ सब लोग अपना अपना मे लाग गईल , केहु से कवनो सम्पर्क भी ना रही गईल रहे लेकिन कबो कबो अवनीश्वा के समाचार ( कभी टी वी पे त कबो अखबार मे ) मिले , कभी गरीबन के न्याय दिलावे खातिर अन्दोलन त कबो सडक बनवावे खातिर हडताल त कबो कालेज बनवावे खातिर बन्द , आ अईसन नेता जवना के लगे ना आपन गाडी , ना कवनो घर , बस गरीबन के सेवा । अईसन समाचार लगभग दु चार दिन पे पढे के मिले आ एह कुल के देखला के बाद हम हमेशा गर्वांवित हो जात रहनी आ अपना जान पहचान के लोगन के कहत रहनी की ई हमार दोस्त हवे ।
अब फेरु से हम वापस आवत बानी एक साल पहिले वाली बात पे , असल मे जब हम बलिया गईनी त अईसही अवनीश्वा किहा खबर भेजवा देहनी की हम आईल बानी आ गाँव पे बानी । फेरु हमरा भी खबर मिलल की उ हमरा से मिले खातिर आवत बा , आ हम गाव मे अपना घरे इंतेजार करत रहनी ।
गर्मी के दिन रहे एह से हम दलनिया मे एगो कोठारी रहल वोह मे ओठंगल रहनी तबे केहु सिकडिया बजावल हम खोलनी त देखनी कि उजर कुर्ता आ पजामा मे एगो आदमी खडा बा बहुत खीस मे बा , हम परिचय पुछनी त मालुम पडल की ई त अवनीश्वा हवे आ जब गले मिलनी त तनी अनमनाहे ढंग से उ मिललस । खैर हम बईठे के कहनी लेकिन उ खडे खडे बडबडात रहे , हमरा बुझाईल ना त हम पुछ देहनी कि का बात बा अवनीश काहे खिसियाईल लागत बाडे ? अवनीश कहत बाडन कि – का कहले बाडे मरदे ई सुधरिहन स ना एकनी के लात के आदमी हवन स जब ले लात ना लागी नु तब तक ले ना सुधरिहन स ! हम पुछनी की के हो ? त कहलन की देख हई रेक्शा वाला के , ई ढाला पर से तोरा दुवार तक के 5 रुपया मांगत बा आ हम 4 रुपया देत बानी त नईखे लेत आ अबहियो भनभनात बा कहत बा की भईया महंगाई बढ गईल बा त हमनी के रेट भी 4 रुपया से 5 रुपया भईल बा । अब तु बताउ ई कवन पेट्रोल से चले वाला गाडी हवे कि महंगाई के असर पडल बा एकनी के ? अरे ई मय लात जुता के बात सुनेलन स आ वोह से ही सही रहेलन स । अच्छा एह बेरा इनकर दाना दवाई हो जाई सांझ हो जाउ । कही देत बानी पप्पुवा से । ( पप्पुवा एगो बदमाश के गिरोह के सरदार हवे जवन बलिया मे मशहुर बा आ कई गो केस चलत बा ओकरा पे )
हमरा त एकदम शाक ( Shock ) मार देहलस , की इहे अवनीश्वा हवे ! आ फेरु हम हिम्मत जुटा के पुछनी के तु त नेता हवे , समान अधिकार के बात करत रहले , गरीबन पे अत्याचार ना होखे देब कहत रहले लेकिन ई का ? ई त सरासर जुलुम बा , पिछला 5 साल से ढाला पर से पियरौटा वाला रोड पे बडका बड्का पथर पडल बा रोड 5 साल मे सही ना भईल , बाकी जवन परेशानी बा उ वोहीतरे बा , आ वोह रोड पे पैदल भी चलल मुश्किल के काम बा आ उहो एह गरमी मे , आ उ तोरा के रेक्शा पे ले के अईलस हा आ ते पांच रुपया नईखे देत ? और ना त ओकरा के मारे मुवावे के कहत बाडे ? ई काहे अवनीश ? ई कवन चेहरा हवे तोर ?
हम नेता ना हई, हम राजनेता हई अगर हम नेता रहती त कतहु मुवल मराईल रहती केहु पुछीत ना , आ खुब रहीत त कवनो राजनेता के पोस्टर चपकावत रहती । आ जेतना आन्दोलन भा हडताल भा बन्द बा उ त बस मिडिया खातिर बा की मिडिया के वजह से ई खबर दुर दुर तक जाउ आ हमनी के राजनेता के इमेज बनल रहे । और जहा तक गरीबी के बात बा त मित्र एह बात के गाँठ बान्हि ले कि हमनी के ( राजनेता ) जब ले रहब जा तब ले गरीब लोगन के गरीबे रहे के बा काहे कि जब ले ई गरीब रहिहन स तब ले हमनी के राजनीति के रंग चोख रही आ तब ले हमनी के राज रही ।
एह के सुनला के बाद हमहु सोचत रहनी की बात सही बा अगर गरीबी मिट जाई त फेरु हमनी के देश के लोकतंत्र चली कईसे ? काहे कि हमनी के नेता ( राजनेता ) लोगन के मुद्दा , वोट , सब त ई गरींब जनता ही बिया आ अगर गरीबी खतम हो जाई त जनता गरीब ना रही आ जब जनता गरीब ना रही त फेरु राजनेता लोगन के व्यवसाय मे बहुत बरियार मन्दी ( रीसेशन / Recession ) आ जाई …..
जय भोजपुरी
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