रघुवीर नारायण जी के लिखल ई गीत आजादी के लडाई के समय से भोजपुरियन के एक संगे जोडे खातिर गावल जाला। अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य परिषद आ कई गो आउर संस्था एह गीत के भोजपुरी के राष्ट्रगीत नियन सम्मान देली सन। हर साल अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के शुरुआत एही गीत से होला।
सुन्दर सुभूमि भैया भारत के देशवा से, मोरे प्रान बसे हिमखोह रे बटोहिया।
एक द्वार घेरे रामा हिम कोतवालवा से, तीन द्वार सिन्धु घहरावे रे बटोहिया।
जाउ जाउ भैया रे बटोही हिन्द देखि आउ, जहँवा कुहुँकि कोयल बोले रे बटोहिया।
पवन सुगंध गंध अगर गगनवा से, कामिनी विरह राग गावे रे बटोहिया।
विपिन अगम घन सघन बगन बीच, चंपक कुसुम रंग देबे रे बटोहिया।
द्रुम वट, पीपल कदम्ब निम्ब आमवृक्ष, केतकी गुलाब फूल फूले रे बटोहिया।
तोता तूती बोले रामा बोले भेंगरजवा से, पपीहा के पी पी जिया साले रे बटोहिया।
सुन्दर सुभूमि भैया भारत के देशवा से, मोरे प्रान बसे गंगा धार रे बटोहिया।
गंगा रे जमुनवा के झगमग पनिया से, सरजू झमकि लहरावे रे बटोहिया।
ब्रह्मपुत्र पंचनद घहरत निशिदिन, सोनाभद्र मीठे स्वर गावे रे बटोहिया।
अपर अनेक नदी उमडि घुमडि नाचे, जुगन के जदुआ चलावे रे बटोहिया।
आगरा प्रयाग काशी दिल्ली कलकतवा से, मोरे प्रान बसे सरजू तीर रे बटोहिया।
जाउ जाउ भैया रे बटोही हिन्द देखि आउ, जहाँ ऋषि चारो वेद गावे रे बटोहिया।
सीता के विमल जस राम जस कृष्ण जस, मोरे बाप दादा के कहानी रे बटोहिया।
व्यास बाल्मीक ऋषि गौतम कपिलदेव, सूतल अमर के जगावे रे बटोहिया।
रामानुज रामानन्द न्यारी प्यारी रुपकला, ब्रह्म सुख बन के भवर रे बटोहिया।
नानक कबीर गौर शंकर श्रीराम कृष्ण, अलख के गतिया बतावे रे बटोहिया।
विधापति कालीदास सूर जयदेव कवि, तुलसी के सरल कहानी रे बटोहिया।
जाउ जाउ भैया रे बटोही हिन्द देखि आउ, जहाँ सुख झुले धान खेत रे बटोहिया।
बुद्धदेव पृथु विक्रमार्जुन सिवाजी के, फिरि-फिर हिय सुध आवे रे बटोहिया।
अपर प्रदेस देस सुभग सुघर वेस, मोरे हिन्द जग के निचोड रे बटोहिया।
सुन्दर सुभूमि भैया भारत के भूमि जोहि, जन रघुवीर सिर नावे रे बटोहिया।
भाई बहुत जल्द हमारा एल्बम आने वाला हैं …
हम भोजपुरी को हर तरह से पहचान दिलाने की कोशिश कर रहे हैं
आ ई मिल के रही
संगीत के साथ अवाज़ भी होती तो मज़ा आ जाता भाई प्रयास करे इस तरफ़ भी यानी एम पी ३ अपलोड करे