जय भोजपुरी

भोजपुरी के असली पहचान दिलावे के एगो कोशिश – http://www.jaibhojpuri.com/

भोजपुरिया हई भाई ! मई 2, 2010

गरीब बानी जा लेकिन दिल के ना
खानी जा लेकिन केहु से छीन के ना
एक बार हमनी से दोस्ती निभा के त देखी
ई असल लोहा के शरीर हवे कवनो टीन के ना

===

हार जीत त जिनगी के हिस्सा हवे
वोह से कबो घबराये के ना
लोगन के साथ मिली भा ना मिली
वोह से कबो हडबडाये के ना
सांच बात कहला से दुख मिली लेकिन
सांच कहे मे कबो शरमाये के ना
नीमन काम करे मे बहुत लोग भरमाई
वोह से कबो भरमाये के ना

===

सांच कही त जिनगी के माने बुझा गईल
कुछ लोगन के बात हमरा के बहुत कुछ सीखा गईल
टुट गईल रहनी हम एह जमाना के दुमुहापन मे
लेकिन कुछ लोगन के साथ हमार हिम्मत बढा गईल ।

 

एगो राजनेता ! मई 2, 2010

Filed under: नेता — Navin @ 6:39 पूर्वाह्न
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प्रणाम आ जय भोजपुरी

एक साल पुरान घटना हवे जब हम जब बलिया गईल रहनी , पहुचे से पहिले बहुत खुश रहनी काहे कि हमार कई गो पुरान संघतिया लोग से मिले के मौका रहल वईसे त कई जाना बलिया से बाहर बाडन जा लेकिन कुछ लोग बा जवन अभी भी बा बलिया मे बा आ वोह मे एगो हमार मित्र अवनीश बाडन जवन आज बलिया के एगो बहुत बरियार नेता हवन, बहुत नाव बा उनुकर लोग उनुकर बहुत सम्मान करेला आ आज के राजनीति के समाचारन पे ध्यान देला के बाद हमरा उनुकर ही याद आ गईल हा । खैर हम पुरा घटनाक्रम के बतावे खातिर रउवा सब के तनी पीछे ले जाईब आ आपन वोह घरी के कुछ चीजन से परिचय कराईब ।

करीब करीब 1991 -92 के बात हवे , जब बलिया गईनी पढे खातिर ( 8 तकले गावे पढले रहनी ) आ ओजुगा पहुचला के बाद उ बडे बडे स्कुल देखनी आ एक से के दोस्त लोग मिलल लोग आ सब लोगन के बडे बडे ख्वाब , जब कही मिली जा त हमनी के बात होखे कि मुम्बई जाईब नोकरी करे त दिल्ली जाईब , खुब पईसा कमाईब आ अईसने कई जाना के विचार रहे , पिंटुवा त कहे कि भाई हम त मर्चेंट नेवी मे जाईब त केवनो कहे कि हम बैंक मैनेजर बनब त केहु डाक्टर त केहु इंजिनियर केहु विदेश जाये के भी कहल आ हमहु काहे शांत बईठी त हम कहनी कि भाई हमरा त उहे नोकरी  चाही जवना मे पईसा खुबे होखे आ वोह खातिर देश जाई भा विदेश । वोही मंडली मे एगो मित्र रहलन अवनीश जी , जब उनुका से पुछाईल त उ कहलन की संघतिया लोग एगो बात हम त बहुत साफ कई दिहल चाहत बानी कि हम भारतीय हई , भारत खातिर मुअब जियब लेकिन कबो भारत छोड के ना जाईब , हम जवन भी कमाईब भारत के सेवा मे लगाईब ।


अवनीश्वा बात सुन के हमनी के मन मे ओकरा खातिर जवन आदर उमडत रहेकी कहे के ना , हमनी के हमेशा अवनीश्वा के आदर दिही जा आ अवनीश्वा भी हमेशा उहे धुने की हम त भाई खाली गरीबन खातिर लागल रहब , गरीबन के उपर अत्याचार ना होखे देब केहु कतहु गरीब ना रही , हर भारतीय के एक समान देखब आ अईसन करब की सब लोग एक दुसरा के एक नजर से देखो समानता बने लोगन के बीच मे । एह कुल के सुनला के बाद हमनी के गर्व होत रहे कि वाह बहुत जबरद्स्त संघतिया बा भाई । कई साल के बाद जब सब लोग छितरा गईल , केहु अमेरिका गईल त केहु रुस त केहु मुम्बई त केहु दिल्ली , आ हमहु वोह समय मुम्बई मे आ गईनी ।

साथ छुटल बात छुटल आ सब लोग अपना अपना मे लाग गईल , केहु से कवनो सम्पर्क भी ना रही गईल रहे लेकिन कबो कबो अवनीश्वा के समाचार ( कभी टी वी पे त कबो अखबार मे ) मिले , कभी गरीबन के न्याय दिलावे खातिर अन्दोलन त कबो सडक बनवावे खातिर हडताल त कबो कालेज बनवावे खातिर बन्द , आ अईसन नेता जवना के लगे ना आपन गाडी , ना कवनो घर , बस गरीबन के सेवा । अईसन समाचार लगभग दु चार दिन पे पढे के मिले आ एह कुल के देखला के बाद हम हमेशा गर्वांवित हो जात रहनी आ अपना जान पहचान के लोगन के कहत रहनी की ई हमार दोस्त हवे ।

अब फेरु से हम वापस आवत बानी एक साल पहिले वाली बात पे , असल मे जब हम बलिया गईनी त अईसही अवनीश्वा किहा खबर भेजवा देहनी की हम आईल बानी आ गाँव पे बानी । फेरु हमरा भी खबर मिलल की उ हमरा से मिले खातिर आवत बा , आ हम गाव मे अपना घरे इंतेजार करत रहनी ।

गर्मी के दिन रहे एह से हम दलनिया मे एगो कोठारी रहल वोह मे ओठंगल रहनी तबे केहु सिकडिया बजावल हम खोलनी त देखनी कि उजर कुर्ता आ पजामा मे एगो आदमी खडा बा बहुत खीस मे बा , हम परिचय पुछनी त मालुम पडल की ई त अवनीश्वा हवे आ जब गले मिलनी त तनी अनमनाहे ढंग से उ मिललस । खैर हम बईठे के कहनी लेकिन उ खडे खडे बडबडात रहे , हमरा बुझाईल ना त हम पुछ देहनी कि का बात बा अवनीश काहे खिसियाईल लागत बाडे ? अवनीश कहत बाडन कि – का कहले बाडे मरदे ई सुधरिहन स ना एकनी के लात के आदमी हवन स जब ले लात ना लागी नु तब तक ले ना सुधरिहन स ! हम पुछनी की के हो ? त कहलन की देख हई रेक्शा वाला के , ई ढाला पर से तोरा दुवार तक के 5 रुपया मांगत बा आ हम 4 रुपया देत बानी त नईखे लेत आ अबहियो भनभनात बा कहत बा की भईया महंगाई बढ गईल बा त हमनी के रेट भी 4 रुपया से 5 रुपया भईल बा । अब तु बताउ ई कवन पेट्रोल से चले वाला गाडी हवे कि महंगाई के असर पडल बा एकनी के ? अरे ई मय लात जुता के बात सुनेलन स आ वोह से ही सही रहेलन स । अच्छा एह बेरा इनकर दाना दवाई हो जाई सांझ हो जाउ । कही देत बानी पप्पुवा से । ( पप्पुवा एगो बदमाश के गिरोह के सरदार हवे जवन बलिया मे मशहुर बा आ कई गो केस चलत बा ओकरा पे )


हमरा त एकदम शाक ( Shock ) मार देहलस , की इहे अवनीश्वा हवे ! आ फेरु हम हिम्मत जुटा के पुछनी के तु त नेता हवे , समान अधिकार के बात करत रहले , गरीबन पे अत्याचार ना होखे देब कहत रहले लेकिन ई का ? ई त सरासर जुलुम बा , पिछला 5 साल से ढाला पर से पियरौटा वाला रोड पे बडका बड्का पथर पडल बा रोड 5 साल मे सही ना भईल , बाकी जवन परेशानी बा उ वोहीतरे बा , आ वोह रोड पे पैदल भी चलल मुश्किल के काम बा आ उहो एह गरमी मे , आ उ तोरा के रेक्शा पे ले के अईलस हा आ ते पांच रुपया नईखे देत ? और ना त ओकरा के मारे मुवावे के कहत बाडे ? ई काहे अवनीश ? ई कवन चेहरा हवे तोर ?

हम नेता ना हई, हम राजनेता हई अगर हम नेता रहती त कतहु मुवल मराईल रहती केहु पुछीत ना , आ खुब रहीत त कवनो राजनेता के पोस्टर चपकावत रहती । आ जेतना आन्दोलन भा हडताल भा बन्द बा उ त बस मिडिया खातिर बा की मिडिया के वजह से ई खबर दुर दुर तक जाउ आ हमनी के राजनेता के इमेज बनल रहे । और जहा तक गरीबी के बात बा त मित्र एह बात के गाँठ बान्हि ले कि हमनी के ( राजनेता ) जब ले रहब जा तब ले गरीब लोगन के गरीबे रहे के बा काहे कि जब ले ई गरीब रहिहन स तब ले हमनी के राजनीति के रंग चोख रही आ तब ले हमनी के राज रही ।


एह के सुनला के बाद हमहु सोचत रहनी की बात सही बा अगर गरीबी मिट जाई त फेरु हमनी के देश के लोकतंत्र चली कईसे ? काहे कि हमनी के नेता ( राजनेता ) लोगन के मुद्दा , वोट , सब त ई गरींब जनता ही बिया आ अगर गरीबी खतम हो जाई त जनता गरीब ना रही आ जब जनता गरीब ना रही त फेरु राजनेता लोगन के व्यवसाय मे बहुत बरियार मन्दी ( रीसेशन / Recession ) आ जाई …..


जय भोजपुरी

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हमार बेटी आ एगो निरीह/बेचारा बाप के सोच !! नवम्बर 29, 2009

Filed under: बेटी आ हमार सोच — Navin @ 11:14 अपराह्न
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रउवा सब से आज हम अपना बेटी के बात करत बानी , जब हम भारत में रहनी वोह समय जब हमके घर के बहरी जात देखे ता कहे मू ( हमहू) ( बहुत आसान रहे ला कहे में )फेरु बहरी जाईब आ हम वोह के बहरी घुमाई , ऊ सब लोगन के “जय हो “ कहे आ मराठी लोग भी जवाब “जय हो ” से जवाब देत रहे | जब हम वोह के बेटी कही ता ऊ इक दम खुश हो के नाच के झूम के हमरा लगे आवे |
अब जब भी हमरा बेटी से हमार बात होला ता हमार पहिला बात रहेला ” बेटी आई लव यु ” आ ओकर जवाब रहेला ” भल यु ” आ फेरु बात के सिलसिला बढ़त जाला कुछ और बात होली सा ( हम ता आई लव यु कहत ना थकानी ) लेकिन एगो बात पता न कैसे कहे लगलास हो सकेला टी वी के असर होई की ऊ ” ढिशुम “ सिख गयिलस , आ जब ऊ ढिशुम करे ता हम कही की ” आह “ ता ऊ बहुत जोर से हसत रहे लेकिन अब ऊ दुखी हो जाले |
हमार घर अईसन बाटे की सड़क लौकेला ता ऊ बालकनी में जा के कुछ न कुछ केहू ना केहू के बोलावत रहेले आ कुछ न कुछ सिखावत रहेले |

अब हमार बेटी पांच दिन और बड हो गईल आ अब ऊ गाय के देखे ले ता कभी अपना दादी के दादी माँ कही के ता कभी अपना मम्मी के माई कह के बोलावे ले आ वोह गाय के देखावे ले ( जे बेचारा हो के सडक पे घुमत रहे ले कुछ खाए के जुगाड़ में कुछ ता खोजे ले आपन पेट भरे खातिर ) |

बात एजुगा ख़तम नईखे होत दू गो नया आदत वोह के हो गईल बाटे पहिला ता वोह के अकेले केहू के नाचल सही नईखे लागत आ जब भी अईसन कुछ देखे ले ता रोवे लागेले तब हमनी के समूह में नाचल लोगन के नाच लगावे के पड़े ला टी वी पे |

आ दुसर बात की जब ऊ केहू के तेज आवाज सुने ले ता रोवे लागेले ओकरा से जेतना प्यार से बोली आ जेतना प्यार से लोग ओकरा संगे बात करे नाच देखावे ओकरा संगे खेले ऊ खूब आनंद ले ले आ ऊ खूब खुश रहेले |

लेकिन एह सब के देख के हमार दुख बढ़ गईल बाटे काहे की

१- आज के समय में जहा देखा लोगन के इक ही बात रहत बाटे ” के हवा तू , तोहरा नियन ढेर लोगन के देखले बानी . जवन मन होई तवन कई लिहा , हम ता इहे करब ( प्यार के कवनो भाव नईखे ,लोगन के आपन चिंता बाटे ,आ ऊ आपन खातिर कुछ भी कई सकेला )

२ – आज के समाज में लोग जानवर ता दूर इंसान के क़द्र नईखे राखत ( ता ऊ गाय के का करी जेकरा के हमनी के ” गौ माता कहे ली जा )

३- समूह में , इक जूट हो के आज के समय में केहू कवनो काम नईखे करत ( इहो जनला के बावजूद की साथ में करी ता सफल राहि भा एकता में शक्ति होला )

४- जी कुछ लोगन के आपन झूठ के सही साबित करे खातिर तनी आवाज बढ़ावे के पडत बाटे लेकिन ऊ लोग जानत नईखे की ओकर झूठ सबके मालूम बाटे |

ता रउवा सब से हमार एगो सवाल बाटे , का ई ज़माना , ई समाज हमरा बेटी के अपना पायी ?? का हमार बेटी एह समाज में रह पायी ??

 

भोजपुरिया नवम्बर 28, 2009

Filed under: भोजपुरिया — Navin @ 7:47 पूर्वाह्न
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भोजपुरियन के आगे केकर का बाटे बिसात हो
इतिहास के देखा जान जईबा भोजपुरियन के औकात हो
भृगु बाबा से शुरू भईल मंगल पाण्डेय के बा साथ हो
कुवर सिंह के दहड़ला से अंग्रेजन के लौकल जात हो
भोजपुरियन के आगे केकर का बाटे बिसात हो
इतिहास के देखा जान जईबा भोजपुरियन के औकात हो
गांधी जी जब हुंकार परलन एह धरती के माटी से
अंग्रेजन के तडेच देहलन सा सुखल बांस के लाठी से
भिखारी ठाकुर के विदेशिया बता देहलस हमनी के जज्बात हो
भोजपुरियन के आगे केकर का बाटे बिसात हो
कबीर दास के दोहा देखा चल दबा अन्हुवात हो
इतिहास के देखा जान जईबा भोजपुरियन के औकात हो
भोजपुरियन के आगे केकर का बाटे बिसात हो
इतिहास के देखा जान जईबा भोजपुरियन के औकात हो

 

भोजपुरी बोल बचन ( दोहा ) !! नवम्बर 25, 2009

Filed under: भोजपुरी दोहा — Navin @ 7:12 अपराह्न
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हमार पहिला कोशिस बाटे भोजपुरी ( बोल बचन) दोहा लिखे के , कुछ गलती ( ऊ ता होखबे करी ) ता हमरा के जरुर बतायिब काहे से की कहल जाला ” असफलता ही सफलता के सीढ़ी हवे

अपने भाषा से उन्नति बाटे अपने भाषा से बाटे मोल |
एह के दिल से समझी एह में नईखे औरु कवनो झोल ||

अंग्रेजी के पढला से रउवा में आई बहुते गुन |
भोजपुरी के बिना रउवा मन में लाग जाई घुन ||

बहुते घुमनी बहुते सीखनी एकर न मिलल कवनो तोड़ |
ए भईया भोजपुरी के बोल के देखा ई भाषा बिया बेजोड़ ||

लोग बदलल , भाषा बदलल और बदलल देस |
तबहू न भरल हमनी के अन्दर कवनो द्वेष ||

प्यार , दुलार में हमनी के ना केहू पीछे छोड़ी |
अब ता केहू एह में ना कवनो दू अर्थी जोड़ी ||

जय भोजपुरी के लईका आ गईल बाडन सा झार के |
फेरु लौटी भोजपुरियन के ऊ असली दिन बहार के ||

गिट – पिट गिट -पिट कम बतियावा भोजपुरी के सीख |
चोन्हा ढेर करबा भोजपुरी से ता मांगे लगबा भीख ||

भोजपुरी भाषा में बोला भोजपुरी में लिहा उड़ान |
दुनिया में जोर से छेड़ा भोजपुरी के सुरीला तान ||

पकड़ी के फेडा के निचे बीतल तोहर असल जवानी |
अब तू काहे फेटत बाड़ा अपना मुर्झायिला मोछ पे पानी ||

भोजपुरी हा मिठ्की भाषा ई भाषा हवे बेजोड़ |
दुनिया में अब तक ना मिलल एकर कवनो जोड़ ||

ढीला शर्ट में टाईट जीन्स में दिहल जिनगी बिताय |
अबका होई भेभा बावला से काहे तू पछताय ||

 

रघुवीर नारायण जी के लिखल गीत “बटोहिया” !! नवम्बर 21, 2009

Filed under: बटोहिया — Navin @ 6:49 अपराह्न
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रघुवीर नारायण जी के लिखल ई गीत आजादी के लडाई के समय से भोजपुरियन के एक संगे जोडे खातिर गावल जाला। अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य परिषद आ कई गो आउर संस्था एह गीत के भोजपुरी के राष्ट्रगीत नियन सम्मान देली सन। हर साल अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के शुरुआत एही गीत से होला।

सुन्दर सुभूमि भैया भारत के देशवा से, मोरे प्रान बसे हिमखोह रे बटोहिया।
एक द्वार घेरे रामा हिम कोतवालवा से, तीन द्वार सिन्धु घहरावे रे बटोहिया।
जाउ जाउ भैया रे बटोही हिन्द देखि आउ, जहँवा कुहुँकि कोयल बोले रे बटोहिया।

पवन सुगंध गंध अगर गगनवा से, कामिनी विरह राग गावे रे बटोहिया।
विपिन अगम घन सघन बगन बीच, चंपक कुसुम रंग देबे रे बटोहिया।
द्रुम वट, पीपल कदम्ब निम्ब आमवृक्ष, केतकी गुलाब फूल फूले रे बटोहिया।
तोता तूती बोले रामा बोले भेंगरजवा से, पपीहा के पी पी जिया साले रे बटोहिया।
सुन्दर सुभूमि भैया भारत के देशवा से, मोरे प्रान बसे गंगा धार रे बटोहिया।

गंगा रे जमुनवा के झगमग पनिया से, सरजू झमकि लहरावे रे बटोहिया।
ब्रह्मपुत्र पंचनद घहरत निशिदिन, सोनाभद्र मीठे स्वर गावे रे बटोहिया।
अपर अनेक नदी उमडि घुमडि नाचे, जुगन के जदुआ चलावे रे बटोहिया।
आगरा प्रयाग काशी दिल्ली कलकतवा से, मोरे प्रान बसे सरजू तीर रे बटोहिया।
जाउ जाउ भैया रे बटोही हिन्द देखि आउ, जहाँ ऋषि चारो वेद गावे रे बटोहिया।

सीता के विमल जस राम जस कृष्ण जस, मोरे बाप दादा के कहानी रे बटोहिया।
व्यास बाल्मीक ऋषि गौतम कपिलदेव, सूतल अमर के जगावे रे बटोहिया।
रामानुज रामानन्द न्यारी प्यारी रुपकला, ब्रह्म सुख बन के भवर रे बटोहिया।
नानक कबीर गौर शंकर श्रीराम कृष्ण, अलख के गतिया बतावे रे बटोहिया।
विधापति कालीदास सूर जयदेव कवि, तुलसी के सरल कहानी रे बटोहिया।
जाउ जाउ भैया रे बटोही हिन्द देखि आउ, जहाँ सुख झुले धान खेत रे बटोहिया।

बुद्धदेव पृथु विक्रमार्जुन सिवाजी के, फिरि-फिर हिय सुध आवे रे बटोहिया।
अपर प्रदेस देस सुभग सुघर वेस, मोरे हिन्द जग के निचोड रे बटोहिया।
सुन्दर सुभूमि भैया भारत के भूमि जोहि, जन रघुवीर सिर नावे रे बटोहिया।

 

आज कल के नेता के नवम्बर 11, 2009

Filed under: आज कल के नेता के — Navin @ 11:20 पूर्वाह्न
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जे जनता के आपस में लड़वावे ला
धर्म जाती के नाम पे भड़कावे ला
क्षेत्र के नाम पे लोगन के बहकावे ला
घोटाला से आपन नाम बनावे ला
स्विस बैंक में पैसा जमा करावे ला
नेता जे चुनाव के समय हाथ जोड़े ला
चुनाव के बाद जनता के हाथ तोडे ला
नेता जे के मतलब नईखे इंसान से
जेकरा हमेशा काम चले ला शैतान ( चमचा ) से
नेता जे के जरुरत बाटे जनता के वोट से
जे के मुहब्बत बाटे खाली बड़े बड़े नोट से
बस हमरा नजर में आज कल के नेता के एहे रूप बा
आ रउवा सोच सकेनी की अइसन नेता से देश के का स्वरुप बा

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ता आगे आई अब एह नेतागिरी के तोडी
कर्णधार बनी आ देश के इक सूत्र में जोड़ी
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उधार अभी बाकी बा !!! नवम्बर 8, 2009

Filed under: उधार अभी बाकी बा — Navin @ 7:16 अपराह्न
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आज हम एह लाइन के उन लोगन खातिर समर्पित करत बानी जे भोजपुरी भाषा के व्यापार के रूप में समझ के रोज रोज कवनो न कवनो नुक्कड़ पे , गली में , चौराहा पे गीत संगीत के जरिये , बोल बचन के जरिये , नेतागिरी के जरिये बेच रहल बा लेकिन ऊ बेचत बाटे भोजपुरी के तोड़ के मरोड़ के , वोह में अश्लीलता के कुछ शब्दन  के जोड़ के लेकिन हकीकत में बेच रहल बाटे नाव भोजपुरी के आ बदनाम हो रहल बिया भोजपुरी |
नेता लोगन के अइसन बाटे की ऊ लोग चिला रहल बा लो दोसरा के बोल देला पे लेकिन खुद रोज भोजपुरिया समाज के नोच खसोट रहल बा लो वोह के पूछे वाला केहू नईखे |
बस अइसने कुछ देख के ई चार लाइन लिखे के मन कई दिहल हाटे आ हमनी के शुरुवात भी हो गईल बाटे अइसन लोगन के खिलाफ झंडा बुलंद करे के , काहे की भोजपुरी भाषा आ समाज के लाल जुट गईल बाडन सा अइसन जयचंद लोगन के जोरदार तमाचा मारे खातिर |
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इक बार फेरु से हमार चेतावनी सुनले, भोजपुरिया के आगाज अभी बाकी बा
जेतना दुख तू हमनी के देले बाड़े , तहनी के ऊ उधार अभी बाकी बा
हमनी के कसम खईले बानी जा उ उधार चुकयिब जा तोहके
इक इक गलती के गिन गिन के बतायिब जा तोहके
धोखा के अंजाम का होला देखायिब जा तोहके
भोजपुरियन के ई अंदाज अभी बाकी बा
तहनी के पैचा फेरब जा ,तहनी के उधार अभी बाकी बा
अब मान जा ना ता बाद में पछताए के पड़ जाई
भोजपुरिया के जब चटकन लागी ता तिलमिलाए के पड़ जाई
संसार के सामने जमीन पे नाक रगड़ के लोटीयाये के पड़ जाई
लोगन के सामने हाथ जोड़ के गिड- गिडाये के पड़ जाई
बात समझ जा , ना अब कवनो राह , ना कवनो दिशा बाकी बा
तहनी के पैचा फेरब जा ,तहनी के उधार अभी बाकी बा
जाग रहल बाडन सा भोजपुरिया के सपूत
माथ पे रगड़ के माई भाषा के नाम के भभूत
खोजत बाडन सा एक एक गो तहनी लेखा कपूत
बस तहनी के पिछाडी बाँध के घुमावल बाकी बा
तहनी के पैचा फेरब जा काहे की तहनी के उधार अभी बाकी बा
भोजपुरिया के आगाज अभी बाकी बा
तहनी के पैचा फेरब जा ,तहनी के उधार अभी बाकी बा
जय भोजपुरी

 

 

 

परेशानी अउर हमार कहानी नवम्बर 5, 2009

हमरा परेशानी बाटे एह समाज से ,
उ बढ़ गईल बाटे अफसरान के राज से ,
दरोगा बाबु के अंदाज से , आ
चार चाँद लाग गईल एह में नेताजी के राज काज से |
जी परेशानी भी बड़ा अजीब बिया ,
ई ता हमनी के बहुते करीब बिया |
हमनी के परेशान होखे नी जा हर मोड़ पे ,
एकरे वजह से चल जाला लोग छोड़ के ,
रिश्ता नाता सब कुछ तोड़ के ,
महतारी बाप से मुह मोड़ के |
हम परेशान बानी नेता लोगन के भाषण से ,
मंतरी संतरी के कुशासन से ,
महंगा मिळत मिलावटी राशन से |
कब ले ख़तम होई ई परेशानी ,
केकरा से सुनाई हम आपन कहानी ,
अब ता हमरा आँख से खाली आवत बाटे पानी |
अब वोही पानी से हम आपन प्यास बुझावत बानी ,
अपना परेशान मन के समझावत बानी|
कब ले रही हमरा संगे ई परेशानी,
कब ख़तम होई एकर कहानी,
आवाज दे के हम रउवा सब के बोलावत बानी,
चली दूर कईल जाऊ सबके परेशानी,
काहे से की आज हमरा पे तनले बिया कालहु रउवा पे तानी,
बस इहे बाटे हमर परेशानी और एकर कहानी|

 

भोजपुरी भाषा और न्याय खातिर इन्तेजार अक्टूबर 12, 2009

कुछ हमार मित्र लोग मीरा कुमार जी से मिले जात बालो ता हम भी आपन सन्देश उहाँ लोगन के संगे भेजत बानी और वोही सन्देश के रउवा लोगन के साथ बाटत बानी —

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जी मीरा कुमार जी ता अनजान नईखी भोजपुरी के दशा और दिशा से लेकिन उनका के ई बता दिहल बहुत जरुरी बाटे के घर के लोगन के बाद में देखल जाला लेकिन अतनो बाद में ना की घर के लोग कुछ अइसन करे पे उतारू हो जाऊ जवना के केहू नईखे सोचले |

आ अइसन नईखे के हमनी के नईखी देखत जा की और भाषा के संगे का होत बाटे और हमनी संगे काहे सौतेला व्यवहार होत बाटे , लेकिन हाँ हमनी के अभी तक मर्यादा में बानी जा समाज के देख के आदमी चुप बाटे लेकिन एह चुप्पी के गलत मतलब निकाले के अगर सरकार भूल कईलस ता ई बहुत बाद गलती हो जाई |

अब रउवा से ( मीरा कुमार जी ) से भोजपुरी के हालत ता छुपल नईखे लेकिन तबो एगो बात कही देत बानी जा —

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अब काहे देर बाटे भोजपुरी के संगे न्याय में

जोड़ दी भोजपुरी भाषा के संविधान के अध्याय में

बहुत सह चुकनी जा हमनी के अब ना और सहाला,

नाही ता मच जाई हड़कंप अब दिल्ली के बाजार में

लोक सभा से राज्य सभा तक हिल जाई एह हाहाकार में

जान लूटा देब जा हमनी के एह भोजपुरी के प्यार में

अब काहे देर बाटे भोजपुरी संगे न्याय में

जोड़ दी भोजपुरी भाषा के संविधान के अध्याय में

 

राज ठाकरे उनकर कुकुर और मुंबई अक्टूबर 7, 2009

Filed under: मुंबई और बाम्बे — Navin @ 9:28 अपराह्न

ऊ मराठी मानुस के गीत गावेले
उनकर कुकुरन के नाम “जेम्स और बोंड” बा
ऊ नॉर्थ इंडियन के मारत पीटत रहे ले
लेकिन उनके अपना उम्मीदवारन प ना कवनो कमांड बा
राजेंद्र महाले बोम्बे ,बम्बई कही कही के चिलायिले
करना जौहर के इ पानी लौउरी से पियवले
पूरा नॉर्थ इंडियन के ई खूब छाक छकौवले
फिर भी राज ठाकरे के कम ना भईल डिमांड बा
ऊ मराठी मानुस के गीत गावेले
उनकर कुकुरन के नाम “जेम्स और बोंड” बा

जी डिटेल खातिर हेजुगा दबाई

 

माई के याद अक्टूबर 7, 2009

Filed under: माई — Navin @ 8:42 अपराह्न
बड़ा याद आवत बाड़े रे माई ,बड़ा याद आवत बाड़े रे माई
कईसे बहरवा में मनवा लगायी ,बड़ा याद आवत बाड़े रे माई
साँझ सवेरे तोर बोलिया रुलावे ,दिन भर ,तोरा हाथ के रोटिया बुलावे
रतिया के बिना थपकी के ना सुतल जाला रे माई
हमके बड़ा आवत बा रोलाई  ,रे माई ,बड़ा याद आवत बाड़े रे माई
गाँव में रहनी ता, रोज हमके जगावे ,जोर जबरदस्ती हमके रोज नहवावे
अपना हथवा से  ते हमके खानवा खियावे , कपडा पहिनावे
अब ई कईसन चक्कर लाग गईल रे माई ,तोर दुलार के खोजे केने जाई रे माई
हमके बड़ा आवत बाटे रोलाई, रे माई , ते बड़ा याद आवत बाड़े रे माई
ते हमरा खातिर कातना कष्ट उठवले ,हमार जिनगी अपना दुलार से गमकवले
हम तोरा के छोड़  परदेश चली आयनी ,हम अपना गुनाह के सजा पाय गयनी
अब न हम कही जयिब रे माई ,हम गंउवे में चार पैसा कामयिब
अब तोरा के छोड़ के कही जयिब ना माई ,रे माई ,बड़ा याद आवत बाड़े रे माई

बड़ा याद आवत बाड़े रे माई ,बड़ा याद आवत बाड़े रे माई

कईसे बहरवा में मनवा लगायी ,बड़ा याद आवत बाड़े रे माई

साँझ सवेरे तोर बोलिया रुलावे ,दिन भर ,तोरा हाथ के रोटिया बुलावे

रतिया के बिना थपकी के ना सुतल जाला रे माई

हमके बड़ा आवत बा रोलाई  ,रे माई ,बड़ा याद आवत बाड़े रे माई

गाँव में रहनी ता, रोज हमके जगावे ,जोर जबरदस्ती हमके रोज नहवावे

अपना हथवा से  ते हमके खानवा खियावे , कपडा पहिनावे

अब ई कईसन चक्कर लाग गईल रे माई ,तोर दुलार के खोजे केने जाई रे माई

हमके बड़ा आवत बाटे रोलाई, रे माई , ते बड़ा याद आवत बाड़े रे माई

ते हमरा खातिर कातना कष्ट उठवले ,हमार जिनगी अपना दुलार से गमकवले

हम तोरा के छोड़  परदेश चली आयनी ,हम अपना गुनाह के सजा पाय गयनी

अब न हम कही जयिब रे माई ,हम गंउवे में चार पैसा कामयिब

अब तोरा के छोड़ के कही जयिब ना माई ,रे माई ,बड़ा याद आवत बाड़े रे माई

 

फेमस फेस ऑफ़ द वीक – जय भोजपुरी में अक्टूबर 7, 2009

Filed under: जय भोजपुरी — Navin @ 6:10 अपराह्न
Tags: ,

फेमस फेस ऑफ़ द वीक के बड़ा चर्चा हो गईल
जय भोजपुरी के सुन्दर इतिहास में एगो पन्ना जुड़ गईल |

1-
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“मीरा जी” के नाम से भोजपुरी मशहूर हो गईल ,
हर भाषा के आगे भोजपुरी अब हूर हो गईल

2-
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“गणेश जी” के नाम बा काफी ,
भोजपुरी खातिर इनकर अरमान बा काफी
इनकर ई भाव देख के सबके घमंड चूर चूर हो गईल
जब ई जुड्ले भोजपुरी से ता भोजपुरी कोहिनूर हो गईल |

3-
********************************************************
“गुरु जी” ता धरोहर हवे भोजपुरी के थाती में
इनका खातिर प्यार छुपल बा हमनी के छाती में
गुरु जी के इक इक बात , भोजपुरी खातिर हूर हो गईल
हमार भोजपुरी ता नूर रहे अब कोहिनूर हो गईल

4-
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“रिंकू भाई” कम्पुटर के बारे सब लोगन के ज्ञान बढ़वले
अपना प्यार भरा कार्टून से लोगन के दिल बहलवले
इनके आईला से जय भोजपुरिया में कमाल हो गईल
इनकर इक इक जानकारी से भोजपुरी मालामाल हो गईल

5-
**********************************************************
“विनोद भाई” नाम के जुडला के महात्तम से हर जगह बवाल हो गईल
ई जय भोजपुरिया साईट, अउर साईट खातिर काल हो गईल
काहे की ,चार हजार भोजपुरियन से भोजपुरिया मालामाल हो गईल
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अभी तो और भी आगे जाये के बाटे एह भोजपुरी के खोज में
जुडल रहियो लो भाई बहिन एह भोजपुरी के भोज में
एकर ऐसन प्रसिद्दि देख के हर जगह रेल पेल हो गईल
एकर दुबई , सिंगापुर और कनाडा तक ले मेल हो गईल |

Link –  http://www.jaibhojpuri.com/profiles/blogs/3634233:BlogPost:42226

 

छोड़ के चली अयिनी देश हो अक्टूबर 5, 2009

Filed under: परदेश — Navin @ 6:53 अपराह्न
Tags: ,
दो चार लाइन हम आपना ऊपर लिखले बानी ….
ई हमार सोच बाटे और हमार स्थिति भी
हम छोड़ के चल अयनी आपन देश
नोकरी करत बानी विदेश में |
गाँव घर सब कुछ रहल
जब ली हम आपना देश में रहनी
प्यार लोगन के खूब उमडल
पर पैसा खातीर चली अयनी परदेश में
हम छोड़ के चल अयनी आपन देश
नोकरी करत बानी विदेश में |
माई बाबु से साथ छुटल
भाई बहिन के याद सातवे
दोस्त मित्र से रिश्ता टूटल
एह पैसा के रेस (Race) में
हम छोड़ के चल अयनी आपन देश
नोकरी करत बानी विदेश में |
चाचा – चाची  के याद सतावे
मेहरारू के हसी खूब रुलावे
बेटी के किलकारी छोडनी
चल अयनी परदेश में
नोकरी करत बानी विदेश में |

दो चार लाइन हम आपना ऊपर लिखले बानी ….

ई हमार सोच बाटे और हमार स्थिति भी

******************************

हम छोड़ के चल अयनी आपन देश

नोकरी करत बानी विदेश में |

गाँव घर सब कुछ रहल

माई बाबू रिश्तेदार सबसे रहनी जुडल

जब ले  हम आपना देश में रहनी

प्यार लोगन के खूब उमडल

पर पैसा खातीर चली अयनी परदेश में

हम छोड़ के चल अयनी आपन देश

नोकरी करत बानी विदेश में |

माई बाबु से साथ छुटल

भाई बहिन के याद सातवे

दोस्त मित्र से रिश्ता टूटल

एह पैसा के रेस (Race) में

हम छोड़ के चल अयनी आपन देश

नोकरी करत बानी विदेश में |

चाचा – चाची  के याद सतावे

मेहरारू के हसी खूब रुलावे

बेटी के किलकारी छोडनी

चल अयनी परदेश में

नोकरी करत बानी विदेश में |

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जय भोजपुरी के बढ़त परिवार हो गईल चार हजार अक्टूबर 4, 2009

Filed under: जय भोजपुरी — Navin @ 3:40 अपराह्न
आज जय भोजपुरिया साईट में भोजपुरी के आगे बढ़ावे के अभियान में ४००० सदस्य लोगन के शामिल होखला पे हमरा मन में कुछ वीर रस जइसन कविता लिखे के विचार आईल हाटे , और हम लिखनी हाटे ई अब रउवा सामने बाटे , अब हमार ई लाइन कतना बढ़िया बिया ऊ ता रुवा बतायिब  |
बहुत बहुत बधाई बाटे पूरा जय भोजपुरी परिवार के
४००० हजार तक पहुँच गयनी जा हमनी के झार के
बस ऐसे ही बढ़त चले ई कारवां बहार के
सब लोगन में बाट्त चली सन्देश ई प्यार के
रुके के नईखे अब ता कतनो आई बाधा,
पर्वत मिलल ते निकल चले के ओकरा के फाड़ के
बहुत बहुत बधाई बाटे पूरा जय भोजपुरी परिवार के
४००० हजार तक पहुँच गयनी जा हमनी के झार के
आगे आगे बढ़त चली बड़का थुनी (mile stone) गाड़ के
अब मंजिल दूर नईखे बढ़ चला तू अब दहाड़ के
ई जय भोजपुरी परिवार हा बाबु देख ला अंखिया चियार के
धरती से पानी निकाल दी धरती के सीना फाड़ के
अब न रुकी ई सेना जवन चलल बिया दहाड़ के
बहुत बहुत बधाई बाटे पूरा जय भोजपुरी परिवार के
४००० हजार तक पहुँच गयनी जा हमनी के झार के

आज जय भोजपुरिया साईट में भोजपुरी के आगे बढ़ावे के अभियान में ४००० सदस्य लोगन के शामिल होखला पे हमरा मन में कुछ वीर रस जइसन कविता लिखे के विचार आईल हाटे , और हम लिखनी हाटे ई अब रउवा सामने बाटे , अब हमार ई लाइन कतना बढ़िया बिया ऊ ता रउवा  बतायिब  |

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बहुत बहुत बधाई बाटे पूरा जय भोजपुरी परिवार के

४००० हजार तक पहुँच गयनी जा हमनी के झार के

बस ऐसे ही बढ़त चले ई कारवां बहार के

सब लोगन में बाट्त चली सन्देश ई प्यार के

रुके के नईखे अब ता कतनो आई बाधा,

पर्वत मिलल ते निकल चले के ओकरा के फाड़ के

बहुत बहुत बधाई बाटे पूरा जय भोजपुरी परिवार के

४००० हजार तक पहुँच गयनी जा हमनी के झार के

आगे आगे बढ़त चली बड़का थुनी (mile stone) गाड़ के

अब मंजिल दूर नईखे बढ़ चला तू अब दहाड़ के

ई जय भोजपुरी परिवार हा बाबु देख ला अंखिया चियार के

धरती से पानी निकाल दी धरती के सीना फाड़ के

अब न रुकी ई सेना जवन चलल बिया दहाड़ के

बहुत बहुत बधाई बाटे पूरा जय भोजपुरी परिवार के

४००० हजार तक पहुँच गयनी जा हमनी के झार के |

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जय भोजपुरी के साईट के पता भी रउवा खातिर दे देत बानी , अगर रउवा भोजपुरी से प्यार बाटे ता इक बार आपन दर्शन एह साईट में भी करायी |

http://www.jaibhojpuri.com/

राउर आपन , राउर संघतिया , राउर मित्र , राउर भाई , राउर दोस्त , राउर दुश्मन

नवीन

 

बच के रहिये ए बाबु अक्टूबर 3, 2009

Filed under: मुंबई और बाम्बे — Navin @ 8:28 अपराह्न
बोम्बे के मुंबई बना के ऊ देखा वोट मांगत बाटे ‘
बिहारी के नचा के मराठी मानुष के खोजत बाटे
आज ऊ हमके मारत बाटे कालहु तोहके के दुत्कारी
साथ में रही के केहू ना ओह के सम्हारी
बच के रहिये  ए भाई एकर केहू न होई
राजनीति के खातिर ई सबके लड़ाई
ई कबो न देखी की के ह माई और के बाप भाई
आज बिहार पे गिरल बाटे कालहु मराठी पे आई
आपस में हम सबके खूब लडाई
एहिसे हम कहत बानी के बच के रहा ई भाई |

बोम्बे के मुंबई बना के ऊ देखा सबसे वोट मांगत बाटे|’

उत्तर भारतीयन  के मार पीट  के मराठी मानुष के खोजत बाटे ||

———————————————

आज ऊ हमके मारत बाटे कालहु तोहके के दुत्कारी

साथ में रही के केहू ना ओह के सम्हारी

बच के रहिये  ए भाई एकर केहू न होई

राजनीति के खातिर ई सबके लड़ाई

ई कबो न देखी की के ह माई और के बाप भाई

आज बिहार पे गिरल बाटे कालहु मराठी पे आई

आपस में हम सबके खूब लडाई

एहिसे हम कहत बानी के बच के रहा ए  भाई |

बच के रहिये  ए भाई एकर केहू न होई

राजनीति के खातिर ई सबके लड़ाई ||

 

जबसे हमरा प्यार हो गईल अक्टूबर 3, 2009

Filed under: भोजपुरी के चार लाइन हमरा दिल से — Navin @ 5:37 पूर्वाह्न

हमार हर पल चुरा लेहलू तू ..
आँख में स्वर्ग के ख्वाब देखा देहलू तू ..
हमार जिनगी त देहल केहू अउरी के हवे ,
लेकिन एह जिनगी के जिए सीखा देहलू तू …

——————————————–

ख़ुशी मिलल ता फेंट के पी गयनी,
शराब के समेट के पी गयनी ,
का करी एह प्यार में खाली पिए के नसीहत मिलल ,
गम मिलल ता हडबडा के पी गयनी|

——————————————–

जिंदगी भर हम जिंदगी से दूर रहनी ,
तहरा खातिर हम अपनों से दूर रहनी ,
अब एह से बढ़ के वफ़ा के सजा का होई ,
तहार हो के तहरो से दूर रहनी |

———————————————

इ कईसन बाटे एहसास ,
खाली तू ही रहेलू हमरा दिल के पास ,
अब नीन्द भी नैइखे आवत हमरा
हर दिन बढे लागत बाटे तहरा के पावे के प्यास |

 

मुंबई या बाम्बे ? अक्टूबर 3, 2009

Filed under: मुंबई और बाम्बे — Navin @ 5:30 पूर्वाह्न

आज करण जौहर माफ़ी मांगे गयल रहलन हटे राज ठाकरे के घरे , काहे से की उनका नवका फिल्म में ऊ ” मुंबई के बोम्बे ” कही देले बाड़े |

लेकिन आज भी फिल्म दुनिया के लोग यु पी बिहार के कभी कमर से हिलावे ला ता कबो बेच किन देला लेकिन ओह के केहू पूछे वाला नईखे |

एही पे हमार दू लाइन रउवा सब खातिर ….

***************************************

बिहार के नाम पे लोग रोज कमर हिलावे लेकिन,
मुंबई के बाम्बे कहला पर बवाल हो गइल |
अब ता राज ठाकरे के सलामी होत बाटे,
जेकरा वजह से मुंबई में लोगन के जियल काल हो गईल ||

***************************************

 

कब ले सहल जाई अइसन बुराई ! अक्टूबर 2, 2009

कब ले सहल जाई अइसन बुराई ,
आज हमरा पे बा काल्हु तहरा पे आयी ,
कही पे भ्रष्टाचार कही पे घूसखोरी,
ता कही बाटे करिया धन के कमाई ,
इ देश के और गर्त में ले के चल जाई
अब ता जागे के समय बाटे
बाद में पछता के कुछ ना हो पायी
आज सुतल रही गायीला ता काल्हु केहू ना तोहके के जगाई
अब भी समय बाटे जाग जा ए मोरे भाई
काहे से की इ सोच लिहा ,
आज हमरा पे बा काल्हु तहरा पे आयी |
फेर पछता के कुछ भी ना हो पाई ,
आज हमरा पे बा काल्हु तहरा पे आयी |

कब ले सहल जाई अइसन बुराई ,

आज हमरा पे बा काल्हु तहरा पे आयी ,

कही पे भ्रष्टाचार कही पे घूसखोरी,

ता कही बाटे करिया धन के कमाई ,

इ देश के और गर्त में ले के चल जाई

अब ता जागे के समय बाटे

बाद में पछता के कुछ ना हो पायी

आज सुतल रही गायीला ता काल्हु केहू ना तोहके के जगाई

अब भी समय बाटे जाग जा ए मोरे भाई

काहे से की इ सोच लिहा ,

आज हमरा पे बा काल्हु तहरा पे आयी |

फेर पछता के कुछ भी ना हो पाई ,

आज हमरा पे बा काल्हु तहरा पे आयी |

 

 
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